बेरोजग़ारी: राजनीति व अनैतिकता के लिए वरदान

युवा शक्ति किसी भी देश के विकास हेतु सबसे महत्वपूर्ण होती है। कोई भी क्रांति, आंदोलन, अभियान, मिशन बिना युवा शक्ति के सफल नहीं हो सकते हैं। सेना या पुलिस अपने साथियों को जवान शब्द से ही संबोधित करते है। परन्तु युवा वह अवस्था है जिसकी तुलना उस कागज़़ से की जा सकती है जिस पर अभी अधूरी इबारत लिखी गई है। युवा में जोश है, उसका ख़ून गर्म है, वह जज़्बाती है, उसके उत्साह, जोश को किसी भी दिशा में मोड़ा जा सकता है या जब युवा एक आंदोलन बन जाता है तो वह बाढ़ के समान अपने सामने आई हर चुनौती को ध्वस्त करने की क्षमता रखता है। देश की आज़ादी से लेकर कोई भी आंदोलन युवाओं के कंधों पर ही पार लगाया गया है। वर्तमान में हम नौजवानों को सरेआम तमंचे लहराते देख रहे हैं। उत्तेजक, भड़काऊ भाषण देकर समाज के हीरो बनते देख रहे हैं। सीना ताने दूसरे धर्मावलम्बीयों पर हमले करते देख रहे हैं यहाँ तक कि मासूम लड़कियों का अपहरण, बलात्कार, हत्या, करते देख रहे हैं, क़ानून अपने हाथ में लेते देख रहे हैं। क्या यह वातावरण एक दिन में बना है ? नहीं।

युवा शक्ति वही करेगी जैसा उसके लिये वातावरण तैयार किया जायेगा और पिछले वर्षों में उसके मन में असंतोष, आक्रोश व दूसरे धर्मों के विरुद्ध घृणा कूट कूट कर भरा जा रहा है। अनुशासन से उसे दूर रखा जा रहा है या कहा जाये तो उसके मन के ख़ाली कागज़़ पर अनैतिकता की इबारत लिखी जा रही है। एक लंबे अरसे की कवायद का यह परिणाम है, जिसके लिये वातावरण बनाने का प्लेटफार्म तैयार किया है सस्ते इंटरनेट ने। हर बेरोजग़ार युवा के हाथ में मोबाइल है, वो भड़काऊ साइट्स से जुड़ा हुआ है, वाट्सअप यूनिवर्सिटी, फ़ेसबुक, ट्विटर, पोर्न साइट्स एक पल में उसके स्क्रीन पर आ जाती है और जो बार बार उसको दिखाया जाता है वह झूठ उसके मानस पटल पर अंकित होता जाता है और यही आपको समाज में चारों और दिखाई दे रहा है। देश की घाघ राजनीति इस युवा शक्ति का जम कर उपयोग कर रही है। क़ानून की शिथिलता, पंगु प्रशासन और क्रिया प्रतिक्रिया ने देश को एक विस्फोटक स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है।

देश का युवा इस समय विकास को भूल चुका है। अर्थव्यवस्था से उसे कोई सरोकार नहीं। वह उस कृत्रिम प्रकाश को सूर्य का समझ रहा है जिसकी चकाचोंध में उसकी आँखें चुंधिया गई हैं। एक तरह से उसकी बेरोजग़ारी और भीड़ सियासतदानों के लिये वरदान और उस युवा के परिवार, सपनों और भविष्य के लिये अभिशाप सिद्ध हो रहा है। युवा वर्ग का विपरीत सेक्स के प्रति आसक्त होना स्वाभाविक है परन्तु इंटरनेट पर सहज उपलब्ध पोर्नोग्राफी ने उसके युवा मस्तिष्क को प्रदूषित कर दिया है यह उसी का परिणाम है कि हम 6 माह तक की बच्चियों के साथ अमानवीय बलात्कार, हत्या की आये दिन की घटनाएँ देश के कोने कोने से सुन रहे हैं। कितनी भी मोमबत्तियाँ जला लें, सेमीनार कर लें परन्तु प्रदूषित मानसिकता के समक्ष हर हथियार भोथरा सिद्ध हो रहा है। देश, समाज ने चिंतन नहीं किया तो आने वाला समय देश के समक्ष और कष्टमय होता दिखाई दे रहा है।