प्रमोशन में आरक्षणः राहुल गांधी ने लगाया बीजेपी पर आरक्षण खत्म करने का आरोप 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरक्षण को लेकर मोदी सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर जमकर हमला बोला है। राहुल ने कहा कि BJP-RSS के डीएनए को आरक्षण चुभता है। आरक्षण खत्म करना उनकी रणनीति है। बीजेपी नौकरियों में कभी आरक्षण नहीं लाएगी, लेकिन हम हम आरक्षण कभी नहीं खत्म होने देंगे।

आरक्षण खत्म करना बीजेपी की रणनीति

संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘मोदी सरकार आरक्षण के खिलाफ है। ये किसी न किसी तरह से आरक्षण को संविधान से निकालना चाहते हैं। इनकी तरफ से ऐसे प्रयास होते रहते हैं। अब फैसला आया कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। यह सब उत्तराखंड की सरकार ने शीर्ष न्यायालय में कहा है। यह आरक्षण को निरस्त करने का बीजेपी का तरीका है। ये चाहते हैं कि एससी-एसटी समुदाय आगे नहीं बढ़ें। BJP-RSS वाले जितना भी सपना देख लें, हम आरक्षण को कभी नहीं मिटने देंगे। ये संविधान का मुख्य हिस्सा है।

क्यों उठ रहा आरक्षण का मुद्दा?

दरअसल, बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए सरकारी नौकरियों में आरक्षण पर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि नौकरियों में आरक्षण का दावा करना मौलिक अधिकार नहीं है। ऐसे में कोई अदालत राज्य सरकारों को SC और ST वर्ग के लोगों को आरक्षण देने का निर्देश नहीं जारी कर सकती है। आरक्षण देने का अधिकार और दायित्व राज्य सरकारों के विवेक पर निर्भर है।

उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले पर SC ने की थी ये टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी उत्तराखंड हाईकोर्ट के 15 नवंबर 2019 के उस फैसले पर की थी, जिसमें उसने राज्य सरकार को सेवा कानून, 1994 की धारा 3(7) के तहत एससी-एसटी कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए कहा था। जबकि उत्तराखंड सरकार ने आरक्षण नहीं देने का फैसला किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 16(4) तथा (4ए) में जो प्रावधान हैं, उसके तहत राज्य सरकार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों को प्रमोशन में आरक्षण दे सकते हैं, लेकिन यह फैसला राज्य सरकारों का ही होगा। अगर कोई राज्य सरकार ऐसा करना चाहती है तो उसे सार्वजनिक सेवाओं में उस वर्ग के प्रतिनिधित्व की कमी के संबंध में डाटा इकट्ठा करना होगा। क्योंकि आरक्षण के खिलाफ मामला उठने पर ऐसे आंकड़े अदालत में रखने होंगे, ताकि इसकी सही मंशा का पता चल सके। लेकिन सरकारों को इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

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