LIC में सरकारी हिस्सेदारी बेचने की घोषणा से लोगों में असमंजस का माहौल

भारतीय जीवन बीमा निगम देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है। 1956 में स्थापित LIC की कुल संपत्ति इस वक्त करीब 36 लाख करोड़ रुपये की है। एलआईसी अभी तक पूरी तरह से सरकारी कंपनी है। बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वे एलान किया कि LIC में सरकार अपनी हिस्सेदारी कम करेगी। इस ऐलान से निवेशक और आमलोग घबराए हुए हैं। इसे लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। ऐसे तमाम सवालों की हम जवाब देने की कोशिश करेंगे।

सरकार LIC की कितनी हिस्सेदारी बेचेगी?

केंद्र सरकार आईपीओ के जरिये कम से कम 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी, क्योंकि यह एक मानदंड है। बाजार विनियामक SEBI के मानक के अनुसार, IPO में 4,000 करोड रुपये से ऊपर की पोस्ट इश्यू वाली कंपनियों के लिए आवश्यक ऑफर कम से कम 10 फीसदी है।

सरकार LIC का IPO कब तक लाएगी?

रिपोर्ट के अनुसार वित्त सचिव राजीव कुमार ने बताया कि LIC को अगले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में सूचीबद्ध किया जाएगा। यानी इसी साल ही LIC का आईपीओ आएगा। इसके समय, तरीके और परिमाण पर अभी फैसला नहीं लिया गया है।

IPO आने से LIC पॉलिसी धारक पर क्या असर पड़ेगा?

जानकार बताते हैं कि सरकार की इस पहल से निवेशकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यानी जिसने भी एलआईसी की पॉलिसी ले रखी है, उन्हें किसी तरह से घबराने की जरूरत नहीं है। यही नहीं, LIC के IPO में निवेश करना भी एक बेहतर और सुरक्षित विकल्प होगा।

LIC के IPO का साइज कितना बड़ा होगा?

शेयर बाजार के एक्सपर्ट मानते हैं कि LIC का आईपीओ दशक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है। शेयर बाजार में लिस्टेड होने के बाद LIC मार्केट कैप के हिसाब देश की सबसे बड़ी कंपनी बन सकती है। इसका बाजार मूल्यांकन 8 से 10 लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है।

LIC का आईपीओ लाने के पीछे सरकार का मकसद क्या है?

सरकार की अगले वित्तवर्ष में LIC के IPO और IDBI Bank में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचकर 90,000 करोड़ जुटाने की योजना है। सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को घटाकर 35 फीसदी करना है। एलआईसी में हिस्सेदारी बेचने के पीछे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का तर्क है कि सूचीबद्धता से कंपनियों में वित्तीय अनुशासन बढ़ता है।

LIC में हिस्सेदारी बेचने के बाद कंपनी का मालिकाना हक किसके पास होगा?

सरकार का कहना है कि LIC का कुछ हिस्सा ही IPO के जरिये विनिनेश किया जाएगा। इसका मालिकाना हक यानी सॉवरेन गारंटी सरकार के पास ही रहेगी। यानी मालिकाना हक पहले की तरह ही सरकार के पास ही रहेगा।

LIC का क्या है कारोबार और किस तरह की है बैलेंस शीट?

LIC भारतीय शेयर बाजार में सालाना 55 से 65 हजार करोड़ रुपये निवेश करती है। वित्त वर्ष 2018-19 में एलआईसी ने बाजार में 68,621 करोड़ रुपये का निवेश किया था। एलआईसी ने शेयरों में निवेश से 23,621 करोड़ का मुनाफा कमाया। वित्त वर्ष 2018-19 में एलआईसी की कुल संपत्ति बढ़कर 31.11 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई थी। इस अवधि में प्रीमियम से आयकर बढ़कर 3.37 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई।

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