HUG DAY 2020: यूं समझे गले लगने के मनोविज्ञान फायदे

वैलेंटाइन वीक चल रहा है। 7 फरवरी से शुरू हुए वैलेंटाइन वीक (Valentine Week) में पांचवे दिन यानी 12 फरवरी को हग डे मनाया जाता है। प्यार करने वालों के लिए तो अहम है, क्योंकि आज के दिन प्यार करने वाले एक दूसरे को प्यार की झप्पी देकर अपने प्यार का इजहार कर लेते हैं। वैसे तो Hug Day साल में एक ही बार आता है लेकिन आप चाहें तो रोजाना किसी ना किसी बहाने अपने चाहने वालों को गले लगा सकते हैं।

हग ड़े का स्वास्थय पर प्रभाव

आज हम आपको गले लगने के रोमांटिक नहीं बल्कि आपकी हेल्थ से जुड़े फायदे बताने जा रहे हैं। इन फायदों की लिस्ट ऐसी है जो आपके जिंदगी को और आसान बनाएगी। हालांकि, यह Hug रोमांस से भरा और एक्साइटमेंट बढ़ाने वाला नहीं बल्कि राहत देने वाला और भावुकता के साथ भरा होता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि किसी अपने से लगे मिलने से हार्ट रेट कन्ट्रोल में रहता हैं और मेटाबोलिज्म बढ़ाती हैं। विज्ञान का कहना है कि अगर आप अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों या चाहने वालों से गले मिलते हैं तो यह आपको मानसिक और शारीरिक रूप से तनाव मुक्त रहने में मदद करता है। किसी से गले लगने से आपकी भावनाओं को भी सहारा मिलता है। जब आप किसी से गले मिलते हैं तो लोगों के दिल एक दूसरे के करीब होते हैं और यही कारण है कि उनमें अकेलेपन, अवसाद, चिंता और यहां तक कि शारीरिक बीमारियों के खिलाफ लड़ने की ताकत बढ़ती है। Hug से आप मन और दिमाग से मजबूत महसूस करते हैं और यही कारण है कि आपका मुड अच्छा रहता है। नतीजा यह होता है कि यह आपके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

हग ड़े का सामाजिक रिश्तों पर प्रभाव

गले लगाने से केवल मानसिक फायदे नहीं बल्कि और भी फायदे हैं। इससे आपका विश्वास मजबूत होता है। फिर चाहे वो आपका दोस्त हो या परिवार का सदस्य। कई बार एक छोटी सी झप्पी बिगड़ी बातें बना देती है और बिगड़े रिश्ते सुधार देती है। गले लगने के दौरान शरीर में आक्सीटोसिन में सुधार होता है जो आपको रिश्ते बेहतर करने में मदद करता है।

दुश्मनों को भी गले लगाते शायरों के अल्फ़ाज़

आज तो यूं गले लग जाओ कि बस

फिर तो जाने तुम्हें कब कब देखें

– अनवार अंजुम

मोहब्बत में शायद कमी रह ही जाती

अगर तू गले लग के रोया न होता

– रोबीना बट

तमाम उम्र का सौदा है एक पल का नहीं

बहुत ही सोच समझ कर गले लगाओ हमें

– मंज़र अय्यूबी

जो दूर रह के उड़ाता रहा मज़ाक़ मिरा

क़रीब आया तो रोया गले लगा के मुझे

– फ़रियाद आज़र

जाते जाते गले लगाता क्या

वो मिरा और दिल दुखाता क्या

– साइमा आफ़्ताब

पिघल रहे हैं हम इक फ़ासले पे बैठे हुए

गले लगो कि ये सीने की आग ठंडी हो

– राना आमिर लियाक़त

वक़्त-ए-रुख़्सत गले लगा लेना

आख़िरी बार ये ख़ता कर दो

– फ़ैसल फेहमी

आते ही जो तुम मेरे गले लग गए वल्लाह

उस वक़्त तो इस गर्मी ने सब मात की गर्मी

– नज़ीर अकबराबादी

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