अखबार से नहीं फैल सकता कोरोना वायरस, जानिए इसका वैज्ञानिक आधार

कोरोना वायरस के कारण पूरा विश्व इन दिनों दहशत में है. शंकाओं और अफवाहों का बाजार गर्म है. कुछ लोगों का कहना है कि अखबार, कागज या नोट से भी कोरोना वायरस फैलता है. इस अफवाह का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. अभी तक अखबार या कागज से कोरोना का संक्रमण होने की एक भी घटना सामने नहीं आयी है, इसलिए यह अफवाह ही प्रतीत होता है कि अखबार से कोरोना वायरस का प्रसार होता है.

यह विचार पूरी तरह अवैज्ञानिक और तर्कहीन

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है ऐसे पैकेट में जो कई जगहों से चलकर आया हो उसपर कोरोना वायरस के जीवित रहने की संभावना काफी कम है. हार्टफोर्ड हेल्थकेयर ने कहा है कि जो चीजें आपके घर पर डिलीवर की जा रहीं हैं, उसे लेकर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं क्योंकि Corona viruses वस्तुओं पर लंबे समय तक नहीं रहता है. अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन का कहना है कि कोरोनावायरस की किसी जीवित जंतु की कोशिकाओं को छोड़कर अधिकांश सतह पर जीवित रहने की दर अच्छी नहीं है। इस बात की आशंका बिल्कुल भी नहीं है कि अगर आप समाचार पत्र पढ़ते हैं तो संक्रमित हो जाएंगे।

अखबार से कोरोना वायरस नहीं फैलने की वजह

शोधकर्ताओं का कहना है कि हवा के संपर्क में आने के बाद वायरस की ताकत तेजी से घट जाती है. क्योंकि वायरस हर 66 मिनट में अपनी आधी शक्ति खो देता है. किसी सतह पर उतरने के बाद वह 3 घंटे तक संक्रामक होता है. 6 घंटे बीतने के बाद उसके संक्रामक होने की आशंका 2 प्रतिशत हो जाती है. अखबार पर यह 24 घंटे भी नहीं रह सकता क्योंकि उसमें बहुत छिद्र होते हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार कोरोना वायरस चिकनी, गैर-छिद्रपूर्ण सतहों पर सबसे लंबे समय तक रहता है.

अखबार बनने की प्रकिया ऑटोमैटिक

आज अधिकांश बड़े समाचार पत्र ऑटोमैटिक मशीनों में छपते हैं। इनमें मनुष्य का दखल नहीं होता है। न्यूज प्रिंट यानी अखबार के कागज से लेकर प्रिंटिंग मटेरियल का इस्तेमाल करने व उसकी फोल्डिंग, पैकिंग और डिस्पैच तक बेहद आधुनिक तकनीक से किया जाता है। इसमें मशीनों का ही इस्तेमाल किया जाता है। इतना ही नहीं, अखबारों ने पाठकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर संक्रमण से बचाने के अन्य भी कई जरूरी उपाय किए हैं।

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