जीवन जैसे थम सा गया….

जीवन जैसे रुक गया है थम गई हैं ख़्वाहिशें और भागती दौड़ती सड़के वीरान हो गईं हैं । स्कूल की चहल-पहल पर ताले जड़ गए हैं । दफ़्तरों की आपाधापी सन्नाटे में तब्दील हो गयी है । रिश्ते और मेल-मिलाप का सौहार्दिक सिलसिला घुटनों में मुहँ दिए उदासी की चादर पर बैठ गया है । सामान्य जन- जीवन बिल्कुल मौन हो गया है । ऐसे माहौल में हम सभी ठहरे हुए इन पलों में अपने पिछले पूरे जीवन को जैसे मुड़ कर देख पाने को बहुत अधिक फ्री हो गए हैं। हर कोई अपने-अपने तरीक़े से इस वक़्त को जी रहा है अपने-अपने अंदाज़ और अहसास से आज हम सभी लबरेज़ हैं । ऐसे में नन्हे मन अपनी ही उलझनों में हैं …..उकता गये हैं इन बंदिशों में l बेवक़्त की स्कूल से, दोस्तों से दूरी इनके बालमन में उहापोह मचाये है । मासूम उदाहरण है यह नन्ही बालिका आध्यात्मिका !!!!

DR SHRI KRISHNAKANAT PATHAK (Senior IAS) एवम श्रीमती APOORVA JI PATHAK की पुत्री जिसने अपनी रचनात्मक प्रवृति की गोद में इस वक़्त का बख़ूबी प्रयोग किया है और अपनी स्वरचित कविता में कॉरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन में अपनी व हर मासूम बच्चे की मनःस्थिति को बख़ूबी प्रकट किया है तो आइए सुनिये उसी की ज़ुबानी यह मनोभाव काव्य के रूप में 👍💐और उनकी प्रेरणा स्रोत हैं उनकी प्यारी नानी …..

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