लाकडाउन से धडाम हुआ शेयर मार्केट, एक दिन में सेंसेक्स 3658 अंक लुढका

लाकडाउन और कोरोनावायरस फैलने के भय से देश के बाजार तेज गिरावट के साथ खुले। जिसके चलते शुरुआती आधे घंटे के अंदर ही बाजार में लोअर सर्किट लगाना पड़ा। बीएसई 2991.85 अंक नीचे गिरकर 26,924.11 पर पहुंच गया। इसी तरह, निफ्टी 842.45 पॉइंट नीचे 7,903 पर पहुंच गया। हालांकि, 45 मिनट बाद बाजार में ट्रेडिंग फिर से शुरू हुई तो गिरावट और बढ़ गई। अभी सेंसेक्स 3639.80 अंक गिरकर 26,276.16 पर और निफ्टी 980.20 पॉइंट नीचे 7,765.25 पर कारोबार कर रहा है।

बाजार के मार्केट कैप में 10 लाख करोड़ रुपए की कमी

सेंसेक्स में तेज गिरावट के कारण बीएसई में लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में 10 लाख करोड़ रुपए की कमी आ गई है। शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद मार्केट कैप 116.09 लाख करोड़ रुपए था, जो अब घटकर 105.91 लाख करोड़ रुपए पर आ गया है।

रुपया पहली बार 76 के नीचे फिसला

डॉलर के मुकाबले रुपया 75.69 पर खुला और कुछ ही देर में 76 के नीचे फिसल गया। यह अब तक का सबसे निचला स्तर है।

बाजार में गिरावट की 3 वजह

1. कोरोनावायरस का संक्रमण फैलने की वजह से देश के कई राज्यों में 31 मार्च तक लॉकडाउन कर दिया गया है।

2. विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। करीब दो हफ्ते में वे 50,000 करोड़ रुपए के शेयर बेच चुके हैं।

3. कोरोनावायरस का संक्रमण फैलने के डर से दुनियाभर के बाजारों में गिरावट आ रही है। हॉन्गकॉन्ग के बाजार में 5% गिरावट देखी गई।

लोअर सर्किट यानी, बाजार का बेहद बुरा वक्त

जुलाई 2001 की सेबी की गाइडलाइन के बाद सर्किट की शुरुआत हुई थी। भारतीय शेयर बाजार में अचानक आए बड़े उतार-चढ़ाव को थामने करने के लिए सर्किट लगाया जाता है। ये दो तरह के होते हैं। अपर सर्किट और लोअर सर्किट। अपर सर्किट तब लगाया जाता है, जब बाजार एक तय सीमा से ज्यादा बढ़ जाता है। और जब उसी सीमा से ज्यादा घटता है तो लोअर सर्किट का इस्तेमाल किया जाता है। सेबी ने सर्किट के लिए तीन ट्रिगर लिमिट 10%, 15% और 20% तय की हैं। यानी उस वक्त बाजार जितने पर है, उसका 10%, 15% और 20% घटने-बढ़ने पर सर्किट लगता है।

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